पराई पीड़ा में अपना दुःख देखना ही धर्म है | Sanatan Sanvad पराई पीड़ा में अपना दुःख देखना ही धर्म है नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस सूक्ष्म और अत्यंत गहरे सत…
प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस मूल सत्य की बात करने आया हूँ जिस पर सनातन धर्म की आत्मा टिकी है — प्राणीमात्र पर दया ही धर्म है। यह कोई भावुक वाक्य नहीं, न ही केवल नैत…
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