स्वाध्याय — स्वयं को पढ़ने की साधना | तु ना रिं स्वाध्याय — स्वयं को पढ़ने की साधना नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं तुम्हें उस अभ्यास की ओर ले चलता हूँ जो बाहरी ज्ञान को भीतर की ज्योति बना देता है — स्वाध्याय। स्वाध्याय का अर्थ केवल ग्रंथ …
सनातन धर्म में शिक्षा को ‘यज्ञ’ क्यों कहा गया सनातन धर्म में शिक्षा को ‘यज्ञ’ क्यों कहा गया सनातन धर्म में शिक्षा को कभी केवल पढ़ना–लिखना नहीं माना गया। यहाँ शिक्षा को जीवन-निर्माण की प्रक्रिया समझा गया—ऐसी प्रक्रिया जिसमें मनुष्य का अहं गलता है, चेतना परिष्कृ…
आज की कड़वी सच्चाई | सनातन धर्म 🔱 आज की कड़वी सच्चाई (सनातन धर्म) लेखक : तु ना रिं 🔱 | प्रकाशन : सनातन संवाद सनातन धर्म ख़तरे में इसलिए नहीं है क्योंकि कोई बाहर से हमला कर रहा है, सनातन ख़तरे में इसलिए है क्योंकि आज का हिंदू अपने ही धर्म को “पुरान…
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