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सनातन संस्कृति में वचन की शक्ति

सनातन संस्कृति में वचन की शक्ति सनातन संस्कृति में वचन की शक्ति सनातन संस्कृति में वचन को केवल शब्द नहीं माना गया, बल्कि उसे शक्ति कहा गया है। यहाँ यह विश्वास है कि जो शब्द मुख से निकलता है, वह केवल ध्वनि नहीं रहता; वह एक ऊर्जा बनकर संसार में प्रवाहित होता है। …

ज्ञान के अभाव को सबसे बड़ा पाप क्यों माना गया

ज्ञान के अभाव को सबसे बड़ा पाप क्यों माना गया ज्ञान के अभाव को सबसे बड़ा पाप क्यों माना गया सनातन धर्म में “पाप” का अर्थ केवल किसी नियम का उल्लंघन नहीं है। यहाँ पाप का मूल अर्थ है—वह अवस्था, जिसमें मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाए। इसी दृष्टि से देखा जाए…