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सेवा ही परम धर्म: सनातन संस्कृति में परोपकार और निष्काम कर्म का वास्तविक अर्थ

सेवा ही परम धर्म: सनातन संस्कृति में परोपकार और निष्काम कर्म का वास्तविक अर्थ सेवा ही परम धर्म: सनातन संस्कृति में निष्काम कर्म का मर्म ✍️ लेखक: तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद "जिस हाथ ने किसी का भार उठाया, उसी हाथ से ईश्वर को छुआ जा सकता है।" …

सहनशीलता — धर्म का आभूषण

सहनशीलता — धर्म का आभूषण सहनशीलता — धर्म का आभूषण तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस गुण की बात करने आया हूँ जिसे कमजोर लोग कमजोरी समझ लेते हैं, और समझदार लोग जीवन का सबसे बड़ा बल मानते हैं — सहनशीलता ही धर्म का आ…