भाई दूज: यम द्वितीया और भाई-बहन के संबंध | Sanatan Sanvad भाई दूज: यम द्वितीया और भाई-बहन के संबंध भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है, कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया को आता है। प्राचीन काल से यह पर्व भाई-बहन के सम्बन्धों का प्रतीक रहा है, पर यह केवल…
बली प्रतिपदा: राजा बली और समाज कल्याण की शिक्षा | Sanatan Sanvad बली प्रतिपदा: राजा बली और समाज कल्याण की शिक्षा दीपावली के बाद का यह पर्व केवल किसी राजा या असुर के वध का स्मरण नहीं है, बल्कि मनुष्य के भीतर की निष्ठा, धर्म, बलिदान और कृतज्ञता का प्रतीक है…
लक्ष्मीपूजन: अमावस्या की रात और समृद्धि का महत्व | Sanatan Sanvad लक्ष्मीपूजन: अमावस्या की रात और समृद्धि का महत्व अमावस्या की रात जब आकाश पूरी तरह अँधेरे में डूबा होता, तब मनुष्य की चेतना स्वयं उस अंधकार से लड़ती थी। यह रात केवल सूर्य और चंद्रमा की अनुपस…
नरक चतुर्दशी: अंधकार नाश और आंतरिक शुद्धि | Sanatan Sanvad नरक चतुर्दशी: अंधकार नाश और आंतरिक शुद्धि नरक चतुर्दशी का प्रकाश तब समझ में आता है जब हम मनुष्य के भीतरी अंधकार को पहचानते हैं। दिवाली से एक दिन पहले आने वाला यह पर्व केवल मौत के किसी असुर से जुड़…
धनतेरस: दीपावली का दूसरा स्पंदन और साधनों का पूजन | Sanatan Sanvad धनतेरस: दीपावली का दूसरा स्पंदन और साधनों का पूजन धनतेरस वह क्षण है जब दीपावली का दूसरा स्पंदन प्रकट होता है—पहले दिन गौ के प्रति कृतज्ञता का दीप प्रज्वलित होता है और दूसरे दिन मनुष्य अपने…
वसुबारस: गौ सेवा और दीपावली का प्रथम प्रकाश | Sanatan Sanvad वसुबारस: गौ सेवा और दीपावली का प्रथम प्रकाश जब हम वसुबारस का नाम लेते हैं, तो यह केवल किसी तिथि का संकेत नहीं होता—यह उस स्मृति की ओर लौटना होता है जहाँ मनुष्य और गौ एक-दूसरे से अलग नहीं थे, बल्…