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धर्म का पालन भीतर से होना चाहिए

धर्म का पालन भीतर से होना चाहिए धर्म का पालन भीतर से होना चाहिए तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं उस सत्य को स्पष्ट करने आया हूँ जिसे समझे बिना धर्म केवल बोझ बन जाता है, और समझ लेने पर वही धर्म जीवन का सौंदर्य बन जाता है —…

धर्म क्या है? — पूजा से आगे जीवन की रीढ़

धर्म क्या है? — पूजा से आगे जीवन की रीढ़ धर्म क्या है? — पूजा से आगे जीवन की रीढ़ तु ना रिं 🔱 | सनातन संवाद नमस्कार, मैं तु ना रिं, एक सनातनी। आज मैं तुम्हें उस शब्द का सच्चा अर्थ बताने आया हूँ जिसे लोग सबसे ज़्यादा बोलते हैं और सबसे कम समझते हैं — धर्म।…

परिवार एक संस्कार है, संस्था नहीं | Family is Not an Institution it is Sanskar

परिवार एक संस्कार है, संस्था नहीं | Family is Not an Institution it is Sanskar परिवार को यदि केवल एक संस्था कह दिया जाए तो यह वैसा ही होगा जैसे किसी मंदिर को केवल एक इमारत कहना। इमारत में दीवारें होती हैं, छत होती है, दरवाज़े होते हैं | पर मंदिर में उन सबके स…

ब्रह्मा देव का सृजन और हिरण्यगर्भ में उत्पत्ति

ब्रह्मा देव का सृजन और हिरण्यगर्भ में उत्पत्ति | Sanatan Sanvad समय के आदि में ब्रह्मा देव का जागरण और सृष्टि की उत्पत्ति समय के आदि में जब ब्रह्मा ने अपने नेत्र खोले और प्रथम बार स्वयं को विराट शून्यता के मध्य खड़े पाया, तब उन्होंने अनुभव किया कि सृष्टि केव…

प्रकृति की रक्षा करना ही पूजा है | Sanatan Dharma Spiritual Wisdom

प्रकृति की रक्षा करना ही पूजा है | Sanatan Dharma Spiritual Wisdom प्रकृति की रक्षा करना ही पूजा है पूजा का अर्थ केवल धूप-बत्ती, आरती और मंत्रोच्चार नहीं है। पूजा का वास्तविक अर्थ है — आदर करना, संभालना, प्रेम और कृतज्ञता के साथ किसी को स्वीकार करना। यदि इस अर्थ को…

हर प्राणी में वही आत्मा है | Sanatan Dharma Spiritual Wisdom

हर प्राणी में वही आत्मा है | Sanatan Dharma Spiritual Wisdom हर प्राणी में वही आत्मा है इस सृष्टि का सबसे गहरा सत्य यही है कि प्रत्येक प्राणी के भीतर जो चेतना धड़क रही है, वह अलग-अलग नहीं है — वह एक ही है। चाहे वह मनुष्य हो या पशु, पक्षी हो या वृक्ष, कीड़ा हो या सू…

धर्म का उद्देश्य सबके कल्याण में है | Sanatan Dharma Wisdom

धर्म का उद्देश्य सबके कल्याण में है | Sanatan Dharma धर्म का उद्देश्य सबके कल्याण में है ✍ लेखक: तुनारिं | प्रकाशित: सनातन संवाद © 2025 धर्म का वास्तविक स्वरूप समझना मनुष्य के लिए सबसे …